बरसा नयनन से नीर नहीं। अबला बनकर क्यों पीर सही।। बरसा नयनन से नीर नहीं। अबला बनकर क्यों पीर सही।।
मैंने दिल के हर कोने में सिर्फ़ उसका नाम लिखा है, मैंने दिल के हर कोने में सिर्फ़ उसका नाम लिखा है,
मिला नहीं चरागा़ं कोई गुमनामी के अंधेरो में मिला नहीं चरागा़ं कोई गुमनामी के अंधेरो में
हर लम्हा हर लम्हा
गली में गली, गली में गली,,,, गली से होकर,घाट पर चला,,,, बढ़ा हुआ था, गंगा जी का प्रव गली में गली, गली में गली,,,, गली से होकर,घाट पर चला,,,, बढ़ा हुआ था, गंगा ...